स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में शिक्षा
शिक्षा का अर्थ है उस पूर्णता को व्यक्त करना जो सभी मनुष्यों में पहले सेविद्यमान है।
शिक्षा क्या है? क्या यह पुस्तक विद्या है? नहीं! क्या वह नाना प्रकार का ज्ञान है? नहीं। जिस संयम के द्वारा इच्छाशक्ति का प्रवाह और विकास वश में लाया जाता है और वह फलदायक होता है, वह शिक्षा कहलाती है।
मेरे विचार से शिक्षा का सार मन की एकाग्रता प्राप्त करना है, तथ्यों का संकलन नहीं। यदि मुझे फिर से अपनी शिक्षा आरम्भ करनी हो और इसमें मेरा वश चले, तो मैं तथ्यों का अध्ययन कदापि न करूँ। मैं मन की एकाग्रता और अनाशक्ति का सामर्थ्य बढ़ाता और उपकरण के पूर्णतया तैयार होने पर उसमें इच्छानुसार तथ्यों का संकलन करता।