(सम्बद्ध : दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर)

राधिका महाविद्यालय के बारे में

शिक्षा को जन-जागरण एवं राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का सर्वाधिक सशक्त माध्यम स्वीकार करते हुए श्री भगत सिंह द्वारा शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के हृदयस्थल गोरखपुर के ग्रामीण अंचल में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की शिक्षण संस्थाओं को संचालित करने हेतु ‘श्री छोटक सिंह मेमोरियल सोसाइटी ' की स्थापना 28 अगस्त 2009 को की गई | राधिका महाविद्यालय, करवल मझगावां (गगहा), गोरखपुर श्री छोटक सिंह मेमोरियल सोसाइटी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कुछ प्रारम्भिक कदमों का प्रतिफल है। गोरखपुर-बड्हलगंज मार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 40 कि मी. दूर दक्षिण स्थित इस महाविद्यालय की नींव विजयादशमी, 28 सितम्बर 2009 को श्री भगत सिंह एवं श्रीमती जीरा देवी के कर कमलों द्वारा रखी गयी | सम्प्रति यह महाविद्यालय दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से सम्बद्ध है।

लक्ष्य एवं उद्देश्य

लक्ष्य

मूल्य आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के लिये एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित किये जाने की योजना से स्थापित राधिका महाविद्यालय प्रथम सत्र से ही छात्र-छात्राओं की पुस्तकीय ज्ञान के साथ ही संस्कारयुकत जीवन एवं पारम्परिक भारतीय मूल्यों के प्रति जागरूक बनाने हेतु कृत-संकल्पित है महाविद्यालय में हम ऐसे वातावरण का सृजन कर रहे हैं कि ज्ञान तथा गुणों के विकास के साथ ही छात्र-छात्राओं में सरलता और ईमानदारी पर आधारित चरित्र एवं व्यक्तित्व का निर्माण किया जा सके | हमारा चरम प्रयास होगा कि हम छात्र-छात्राओं में कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्र व समाज के प्रति नि स्वार्थ सेवा-भाव तथा उत्कृष्टता व ज्ञान के प्रति पिपासा का भाव जागृत कर सके।

उद्देश्य

अकादमिक उत्कृष्टता ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। वस्तुत: शिक्षा, बौद्धिक, शारीरिक व आध्यात्मिक विकास का समेकित रूप है।हम अपने विद्यार्थियों का इस तरह निर्माण करेंगे कि वे प्रतिस्पर्धी दुनिया की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें तथा समाज एवं राष्ट्र की सेवा हेतु समर्पित रहें | अकादमिक उत्प्रेरणा के अतिरिक्त, महाविद्यालय विविध पाठ्य सह एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों तथा कार्यक्रमों (C –curricular and extra-curricular activities and programs) के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक दायित्वबोध एवं नेतृत्व के गुणों के विकास हेतु सतत्‌ प्रयत्नशील रहेगा जिससे समाज के अन्तिम व्यक्ति के प्रति वे संवेदनशील रहें। महाविद्यालय, वह प्रत्येक प्रयास करेगा जिससे शिक्षा को अधिक प्रासंगिक एवं सार्थक बनाया जा सके।